अपठित गद्यांश - शेर और खरगोश की कहानी:

 निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उत्तर दीजिए-

सुंदरवन नाम का एक जंगल था, जहां सभी जानवर मिलजुल कर रहा करते थे। जंगल का राजा शेर थोड़ा बूढ़ा हो गया था और उसे शिकार करने में दिक्कतें आने लगी थी। एक दिन एक लोमड़ी रास्ते से जा रही थी, तभी अचानक शेर ने उसे दबोच लिया। शेर उसका शिकार करने ही वाला था कि, अचानक से वो लोमड़ी बोली – अरे मालिक, आप मुझे क्यों खा रहे हैं। मैं तो पहले से ही पतली सी हूं, मुझमें तो न मांस है न हड्डी है। मुझे खाकर आपकी भूख शांत नहीं होगी। लोमड़ी की बात सुनकर शेर बोला – मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, मुझसे वैसे भी आजकल शिकार नहीं होता है। तो आज तुम मिली हो तो मैं तुमसे ही अपना काम चला लूंगा। लोमड़ी बहुत ही चालक थी, राजा की बात सुनकर उसके दिमाग में एक आइडिया आया और वो बोली – राजा साहब मेरे पास एक तरकीब है, जिससे रोजाना आपकी भूख भी मिट जाएगी और मेरी जान भी बच जाएगी। ये सुनकर शेर बोला – क्या आइडिया है, जरा मुझे भी बताओ। लोमड़ी बोली – आज से आपको शिकार के लिए कहीं भी जाने की जरूरत नहीं है, मै आपके लिए शिकार ढूंढकर लाऊंगी। ये सुनकर शेर लोमड़ी की बात मान गया। 


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